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Wednesday, February 7, 2018

हजारों को सिखाया अब जीवन शिल्प में आये आ. प्राचार्य पाटिल जी

आ.शान्ति पाटिल जी प्राचार्य पी.टी.एस. जयपुर दोबारा जीवन शिल्प के आंगन में..
        जीवन शिल्प जहाँ अच्छे माहौल, अध्ययन और अनुशासन के लिए जाना-जाता है वहीं समय-समय पर विशेषज्ञों के द्वारा सम्बोधन उन्हें गुणी, उत्साही बनने के लिए प्रेरित करता रहता है।
इसी क्रम में पण्डित टोडरमल स्मारक महाविद्यालय जयपुर के प्राचार्य आ.शान्ति पाटिल जी पधारे। यह संस्था जैन अध्यात्म के प्रचार-प्रसार में करीब 50 वर्षों से संचालित देश की सफलतम संस्था है। यहाँ शास्त्री का अध्ययन के साथ मानव जीवन को सार्थक करने के लिए धन से परे  विद्यार्थियों को अध्यात्मविद्या के साथ धर्म पथ का ज्ञान कराया जाता है।
यहाँ के प्राचार्य धीर-गम्भीरता एवं अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले आ.शांति जी ने 6 फरवरी को जीवन शिल्प छात्राओं को सम्बोधित कर उन्हें अध्ययन की बारीकियां और सदाचार की प्रेरणा दी। सोशल मीडिया से जीवन शिल्प के कार्यों की पूरी जानकारी की बात करते हुए एवं प्रसंशा करते हुए उन्होंने अनवरत सदाचार-मय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए जीवन शिल्प को बधाई एवं प्रबन्धक विकास जैन को मंगलाशीष प्रदान किया।

Thursday, February 1, 2018

शानदार रहा जीवन शिल्प पांचवा छात्र विदाई समारोह2018

जीवन शिल्प विद्यार्थियों के पांचवे विदाई समारोह ने सबको भावुक किया..
        11th क्लास द्वारा 12th क्लास को दिए गए विदाई समारोह में जहाँ कार्यक्रम ने सबकों हँसाया-मनोरंजन किया तो वही विदाई के क्षणों में ख़ूब आशु भी छलकाये ..
        जीवन शिल्प इण्टर कॉलेज का 5वे बैच का विदाई समारोह और 10th क्लास का शुभकामना समारोह का रंग बिल्कुल एक परिवार के समारोह की तरह नजर आया  जिसमें आगन्तुक अतिथी जनों का तो स्वागत-सत्कार हुआ साथ ही जीवन शिल्प प्रबन्धक एवं शिक्षकों ने विद्यार्थियों का भी सम्मान किया और गिफ्ट प्रदान किये तो छात्र/छात्राओं ने दुगने उत्साह के साथ टीचर्स का सम्मान किया और उन्हें प्यारी सी भेटें दी।
        छात्र/छात्राओं ने विद्यालय से अध्ययन के साथ स्वच्छता करुणा,क्षमा, अहिंसा-सत्यादि अनेक नैतिक गुण कुशलता पूर्वक सीखने की बात कही तो अतिथिजन ने जीवन शिल्प छात्रों की प्रसंशा करते हुए उन्हें योग्य, अनुशासित, विनम्र, अध्ययनशील बताया तो जीवन शिल्प संस्थान को देश का योग्य नागरिक देने में प्रयासरत जिले का अब्बल शिक्षण संस्थान बताया।
        ग्रामीण शिक्षा जागृति अभियान 2018 का उद्घाटन करते हुए गाँव-गाँव जाकर शिक्षा देने के जीवन शिल्प प्रयास को प्रारम्भ करने की घोषणा की।
बाद में केक और मिष्ठान्न के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
       कार्यक्रम में बाहर से पधारे अतिथी, क्षेत्रजन, जीवन शिल्प इण्टर कॉलेज एवं जीवन शिल्प पब्लिक स्कूल से समस्त छात्र/छात्राएं एवं शिक्षक/शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

Monday, January 29, 2018

जीवन शिल्प गाँव-गाँव शिक्षा प्रसार अभियान

     🙏 आप सादर आमंत्रित 🙏
मिलकर करे काम..             शिक्षित हो हर गाँव..
      🇮🇳 जीवन शिल्प ग्रामीण शिक्षा
               जागृति अभियान 2018🇮🇳
30 जनवरी 12th क्लास छात्र/छात्राओं को मंगलमय जीवन की शुभ-कामनामय विदाई समारोह के साथ आपकी गरिमामय उपस्थिति में ⛺ ग्रामीण शिक्षा अभियान* का उद्घाटन किया जाएगा।
        हम जीवन शिल्प अध्यापकों एवं पूर्व विद्यार्थियों के साथ गाँव-गाँव जाकर शिक्षा के महत्व को बतलाएगे साथ ही सरकारी स्कूल के बच्चों से मिलकर उन्हें शिक्षण और पुरुष्कार प्रदान कर शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करेंगे।
        इस अभियान का मुख्य उद्देश्य 3 माह में करीब 35 गाँव-देहांत के गरीब-अशिक्षित लोगों एवं उनके बच्चों की शिक्षा के प्रति उदासीनता दूर करना है और  शिक्षा की आवश्यकता समझाकर उसके लिए उपयोगी कार्य करना है।
सोचें-समझें..
             शिक्षा से हो ग्राम विकास।।
            ग्राम विकास से देश विकास।।
        शासन-प्रशासन नही हम भी तो करे
                     अपने देश के लिए कुछ..
                 🙏🙏निवेदक🙏🙏
       🇮🇳 जीवन शिल्प इण्टर कॉलेज 🇮🇳
                 बानपुर, ललितपुर (उ.प्र.)

Friday, December 29, 2017

जीवन शिल्प खेल महोत्सव सम्पन्न.. जीवन शिल्प को मंत्री जी ने ख़ूब सराहा.. सबने माना यहाँ हो रहा सम्पूर्ण विकास

जीवन शिल्प इण्टर कॉलेज में प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
छात्र/छात्राओं के शारीरिक लाभ, एकाग्रता, रुचि एवं उत्साह को ध्यान में रखते हुए बालक एवं बालिका क्रिकेट, बैडमिंटन, दौड़, ऊँची कूद, लम्बी कूद, स्लो साइकिलिंग, कबड्डी, खो-खो, वॉलीवाल, कैरम, चैस, जलेवी दौड़ इत्यादि खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
जीवन शिल्प इण्टर कॉलेज के मेजर ध्यानचंद खेल परिसर और बालिकाओं के खेल वीरांगना लक्ष्मीबाई खेल परिसर में सम्पन्न हुए।
सप्ताह भर चले इन खेलों का आनन्द गाँव और क्षेत्र के अनेक लोगों एवं श्रेष्ठिजनों ने लिया एवं सभी ने छात्र/छात्राओं का उत्साहवर्द्धन किया।

खेलों के समापन दिवस में राज्यमंत्री मनोहर लाल पंत ने आकर जीवन शिल्प के शिक्षण कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि जीवन शिल्प प्रदेश के सर्वोत्तम विद्यालयों में है जो कि भारतीय संस्कृति के अनुरूप बालकों के सर्वागींण विकास का उत्तम कार्य कर रहा है।
मंत्री जी की उपस्थिति में गरीब-असहायों को कम्बल वितरण किये गये एवं क्रिकेट, कबड्डी, जलेवी दौड़ के फाइनल मैच प्रारम्भ किये।
          हमे गौरवान्वित किया राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ, प्रधान प्रतिनिधि सहविन्द सिंह, चौ.राजकुमार जैन,चौ.अखिलेश जैन,मनोहर पुष्पकार, चौ.आनन्द जैन, देवेन्द्र गुप्ता, डा. आशीष रावत, अरुण द्विवेदी, सुनील चौरसिया,अमित रावत,हरिबल्लभ सोनी सहित जीवन शिल्प इण्टर कॉलेज प्रबन्धक विकास जैन, मनोज पुष्पकार, शिवकांत नामदेव,दीपक नामदेव, ग्यासीराम कुशवाहा एवं जीवन शिल्प पब्लिक स्कूल के अध्यापक/अध्यापिकाएं उपस्थित रहे। संचालन जीवन शिल्प प्रबन्धक विकास जैन ने किया।
इस अवसर पर चौ.अखिलेश जैन के नेतृत्व में समस्त उपस्थित सभ्रांत नागरिकों एवं जीवन शिल्प अध्यापक एवं छात्र/छात्राओं ने जीवन शिल्प विद्यालय में उपस्थित राज्यमंत्री से ग्राम बानपुर को ब्लॉक एवं नगर पंचायत बनाये जाने की मांग रखी।
राजकीय डिग्री कालेज की मांग एवं ललितपुर-टीकमगढ़ रोड का निर्माण कराये जाने हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
जीवन शिल्प छात्र/छात्राओं द्वारा खेल व विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये।
अन्त में जीवन शिल्प प्रबन्धक विकास जैन ने मंत्री जी एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए क्षेत्र में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के प्रसार का संकल्प के साथ सभा विसर्जित की घोषणा की।

Friday, October 6, 2017

क्षमामय रही गाँधी जयंती

जीवन शिल्प में विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी 2 अक्टूवर गाँधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिवस के साथ उनकी विशेषताओं को समर्पित रहा। इस दिन विशाल झांकी के साथ जुलुस द्वारा नगर भ्रमण किया गया।
विशेष रूप से इस दिन को जीवन शिल्प क्षमा पर्व के रूप में मनाता आ रहा  है। इसका लक्ष्य जीवन में ईर्ष्या, द्वेष, क्रोधादि से दूर कर परस्पर सहयोग, मैत्री, दया, करुणा, क्षमादि गुण प्रगट कर छात्र जीवन में ही वास्तविक शिक्षा को आत्मसात् कराना है।
भारतीय शिक्षण पद्धति को अपने में संजोने का प्रयास करता जीवन शिल्प शिक्षा के साथ सदैव जीवन मूल्यों के साथ मूल्यपरक शिक्षा की बात करता है।
गाँधी और शास्त्री को याद करते हुए क्षमा पर प्रकाश डालते कैलाश चन्द जैन ने कहा कि जब हम किसी को बुरा कहेंगे तो वह भी हमे बुरा ही कहेगा पर जब हम भला कहेगे तो सामने वाला भी अच्छे उत्तर के लिए तैयार होता है।
संस्था प्रबन्धक विकास जैन ने आज के समय के अनुसार बदलाव के लिए महापुरुषों की जयकार की जगह उनके गुणों को अपने में उतारने की बात पर जोर देते हुए अपने क्षेत्र में शिक्षा के साथ क्षमा की उपयोगिता को दर्शाया। दो अक्षर का क्षमा शब्द अपने में अनेक रहस्य और गुथ्थियों को सुलझाने का साहस प्रदान करता है।
आज छोटे से कारण से हुई अनेक लड़ाई परिवारों को अस्पताल और जेल पहुँचाते हुए समाचारों में अक्सर देखी जा सकती है। ऐसे में यदि शुरुआत में ही 'क्षमा करे' या 'sorry' बोल दिया जाएं तो अस्पताल और पुलिस के प्रकोप से बचा जा सकता है।
विद्यालय परिसर में क्षमा पर्व के इस पुनीत अवसर पर सभी ने आपस में क्षमा माँग कर विनम्रता का परिचय दिया।
अंत में सभी जीवन शिल्प इण्टर कॉलेज और जीवन शिल्प पब्लिक स्कूल के छात्र/छात्राओं को क्षमा धारण करने का संकल्प दिलाया गया।
कार्यक्रम के समापन के बाद सभी विद्यार्थी अपने कक्षाओं में पहुचे उनका आएं अतिथियों द्वारा नैतिक शिक्षा और सामान्य ज्ञान से सम्बंधित प्रश्न पूछकर मौखिक परीक्षण किया गया। जिसमें सभी छात्रों ने बढ़-चढ़-कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में कैलाशचन्द जैन, राजकुमार जैन, अखिलेश जैन, प्रबन्धक विकास जैन, अभिभावक जन एवं सभी जीवन शिल्प शिक्षक और छात्र/छात्रा उपस्थित रहे।

क्षमामय रही गाँधी जयंती

जीवन शिल्प में विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी 2 अक्टूवर गाँधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिवस के साथ उनकी विशेषताओं को समर्पित रहा। इस दिन विशाल झांकी के साथ जुलुस द्वारा नगर भ्रमण किया गया।
विशेष रूप से इस दिन को जीवन शिल्प क्षमा पर्व के रूप में मनाता आ रहा  है। इसका लक्ष्य जीवन में ईर्ष्या, द्वेष, क्रोधादि से दूर कर परस्पर सहयोग, मैत्री, दया, करुणा, क्षमादि गुण प्रगट कर छात्र जीवन में ही वास्तविक शिक्षा को आत्मसात् कराना है।
भारतीय शिक्षण पद्धति को अपने में संजोने का प्रयास करता जीवन शिल्प शिक्षा के साथ सदैव जीवन मूल्यों के साथ मूल्यपरक शिक्षा की बात करता है।
गाँधी और शास्त्री को याद करते हुए क्षमा पर प्रकाश डालते कैलाश चन्द जैन ने कहा कि जब हम किसी को बुरा कहेंगे तो वह भी हमे बुरा ही कहेगा पर जब हम भला कहेगे तो सामने वाला भी अच्छे उत्तर के लिए तैयार होता है।
संस्था प्रबन्धक विकास जैन ने आज के समय के अनुसार बदलाव के लिए महापुरुषों की जयकार की जगह उनके गुणों को अपने में उतारने की बात पर जोर देते हुए अपने क्षेत्र में शिक्षा के साथ क्षमा की उपयोगिता को दर्शाया। दो अक्षर का क्षमा शब्द अपने में अनेक रहस्य और गुथ्थियों को सुलझाने का साहस प्रदान करता है।
आज छोटे से कारण से हुई अनेक लड़ाई परिवारों को अस्पताल और जेल पहुँचाते हुए समाचारों में अक्सर देखी जा सकती है। ऐसे में यदि शुरुआत में ही 'क्षमा करे' या 'sorry' बोल दिया जाएं तो अस्पताल और पुलिस के प्रकोप से बचा जा सकता है।
विद्यालय परिसर में क्षमा पर्व के इस पुनीत अवसर पर सभी ने आपस में क्षमा माँग कर विनम्रता का परिचय दिया।
अंत में सभी जीवन शिल्प इण्टर कॉलेज और जीवन शिल्प पब्लिक स्कूल के छात्र/छात्राओं को क्षमा धारण करने का संकल्प दिलाया गया।
कार्यक्रम के समापन के बाद सभी विद्यार्थी अपने कक्षाओं में पहुचे उनका आएं अतिथियों द्वारा नैतिक शिक्षा और सामान्य ज्ञान से सम्बंधित प्रश्न पूछकर मौखिक परीक्षण किया गया। जिसमें सभी छात्रों ने बढ़-चढ़-कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में कैलाशचन्द जैन, राजकुमार जैन, अखिलेश जैन, प्रबन्धक विकास जैन, अभिभावक जन एवं सभी जीवन शिल्प शिक्षक और छात्र/छात्रा उपस्थित रहे।

क्षमामय रही गाँधी जयंती


जीवन शिल्प में विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी 2 अक्टूवर गाँधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिवस के साथ उनकी विशेषताओं को समर्पित रहा। इस दिन विशाल झांकी के साथ जुलुस द्वारा नगर भ्रमण किया गया।
विशेष रूप से इस दिन को जीवन शिल्प क्षमा पर्व के रूप में मनाता आ रहा  है। इसका लक्ष्य जीवन में ईर्ष्या, द्वेष, क्रोधादि से दूर कर परस्पर सहयोग, मैत्री, दया, करुणा, क्षमादि गुण प्रगट कर छात्र जीवन में ही वास्तविक शिक्षा को आत्मसात् कराना है।
भारतीय शिक्षण पद्धति को अपने में संजोने का प्रयास करता जीवन शिल्प शिक्षा के साथ सदैव जीवन मूल्यों के साथ मूल्यपरक शिक्षा की बात करता है।
गाँधी और शास्त्री को याद करते हुए क्षमा पर प्रकाश डालते कैलाश चन्द जैन ने कहा कि जब हम किसी को बुरा कहेंगे तो वह भी हमे बुरा ही कहेगा पर जब हम भला कहेगे तो सामने वाला भी अच्छे उत्तर के लिए तैयार होता है।
संस्था प्रबन्धक विकास जैन ने आज के समय के अनुसार बदलाव के लिए महापुरुषों की जयकार की जगह उनके गुणों को अपने में उतारने की बात पर जोर देते हुए अपने क्षेत्र में शिक्षा के साथ क्षमा की उपयोगिता को दर्शाया। दो अक्षर का क्षमा शब्द अपने में अनेक रहस्य और गुथ्थियों को सुलझाने का साहस प्रदान करता है।
आज छोटे से कारण से हुई अनेक लड़ाई परिवारों को अस्पताल और जेल पहुँचाते हुए समाचारों में अक्सर देखी जा सकती है। ऐसे में यदि शुरुआत में ही 'क्षमा करे' या 'sorry' बोल दिया जाएं तो अस्पताल और पुलिस के प्रकोप से बचा जा सकता है।
विद्यालय परिसर में क्षमा पर्व के इस पुनीत अवसर पर सभी ने आपस में क्षमा माँग कर विनम्रता का परिचय दिया।
अंत में सभी जीवन शिल्प इण्टर कॉलेज और जीवन शिल्प पब्लिक स्कूल के छात्र/छात्राओं को क्षमा धारण करने का संकल्प दिलाया गया।
कार्यक्रम के समापन के बाद सभी विद्यार्थी अपने कक्षाओं में पहुचे उनका आएं अतिथियों द्वारा नैतिक शिक्षा और सामान्य ज्ञान से सम्बंधित प्रश्न पूछकर मौखिक परीक्षण किया गया। जिसमें सभी छात्रों ने बढ़-चढ़-कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में कैलाशचन्द जैन, राजकुमार जैन, अखिलेश जैन, प्रबन्धक विकास जैन, अभिभावक जन एवं सभी जीवन शिल्प शिक्षक और छात्र/छात्रा उपस्थित रहे।